अपठित गद्यांश Hindi Unseen Passages IV [05]
दो असमानों में कभी तुलना नहीं हो सकती। जैसे मित्रता समान स्तर के लोगों में होती है, उसी प्रकार तुलना, समानता और स्पर्द्धा भी समान लोगों में होनी चाहिए। जब हम भारत बांग्लादेश या नेपाल जैसे देश की तुलना अमेरिका के जीवन-स्तर से करते हैं तो वास्तव में उसके साथ अन्याय करते हैं। जैसे पहलवानी में समान वजन के पहलवानों की कुश्ती होती है। क्रिकेट में जूनियर, सीनियर, महिला, पुरुष क्रिकेट के अलग-अलग मुकाबले होते हैं, उसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में समानों की तुलना होनी चाहिए। बड़े लोगों का स्वार्थ यह हो सकता है कि वे स्वयं को विश्व का सर्वोच्च व्यक्ति सिद्ध करने के लिए सारे संसार को ललकारें तथा विश्व-समानता का नारा देकर छोटों को प्रतियोगिता में घसीटें, हराएँ तथा विजय-सुख लूटें। किंतु ऐसे मुकाबले अन्यायपूर्ण हैं, अभिप्रायपूर्ण हैं, छलपूर्ण हैं। समान स्तर के लोगों में समानता होनी चाहिए, न कि विषमों में।
प्रश्न:
(क) कौन-सी बातें समान लोगों में होनी चाहिए?
- तुलना
- समानता
- स्पर्द्धा
- उपरोक्त सभी
(ख) लेखक अमेरिका की तुलना किन देशों के जीवन स्तर से करने की बात को अन्यायपूर्ण कहता है?
- भारत, जापान
- भारत, बांग्लादेश या नेपाल
- नेपाल, भारत
- भारत, बांग्लादेश
(ग) क्रिकेट में किन के अलग – अलग मुकाबले होते हैं?
- जूनियर, सीनियर
- महिला, पुरुष
- (1) और (2) दोनों
- इनमें से कोई नहीं
(घ) बड़े लोगों का क्या स्वार्थ होता है?
- अपने को शक्तिशाली सिद्ध करना
- सारे संसार को ललकारें
- छोटों को प्रतियोगिता में घसीटें
- (1) और (3) दोनों
(ड़) असमान लोगों में किया गया मुकाबला कैसा होता है?
- अन्यायपूर्ण
- अभिप्रायपूर्ण
- छलपूर्ण
- उपरोक्त सभी
(च) जीवन के हर क्षेत्र में किनकी तुलना होनी चाहिए?
- समान
- असमान
- विषम
- उच्च स्तर
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