Pastoralists in the Modern World

बाल मजदूरी / बाल श्रम पर विद्यार्थियों और बच्चों के हिंदी भाषण

बाल मजदूरी / बाल श्रम पर भाषण 3

आदरणीय प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षिकाएं, मेरे सीनियर (वरिष्ठ सहपाठी) और मेरे प्यारे सहपाठियों, सभी को मेरा सुप्रभात। मेरा नाम… है। मैं कक्षा………. में पढ़ता / पढ़ती हूँ। इस अवसर पर, मैं आपके सामने बाल श्रम, इसके कारण और समाज में इसे रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदमों पर भाषण देना चाहता / चाहती हूँ। मैं अपने / अपनी कक्षा अध्यापक / अध्यापिका का / की बहुत आभारी हूँ, जिन्होंने इस महान अवसर पर मुझे अपने विचार आप सब के सामने रखने का अवसर प्रदान किया।

बाल श्रम प्राचीन समय से, पूरे विश्व के समाज में वर्षों से चली आ रही बुरी प्रथा है। यह केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है बल्कि एक वैश्विक मुद्दा है। बाल श्रम वो प्रक्रिया है जिसमें बच्चों को बहुत कम वेतन पर कार्य करने के लिए नियुक्त किया जाता है। सामान्यतः, वो बच्चों को अंशकालिक आधार (पार्ट टाइम) पर आर्थिक क्रियाओं में शामिल करते हैं। कहीं-कहीं बच्चों से पूरी रात और अधिक समय के लिए, बिना किसी छुट्टी के वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए कार्य कराया जाता है। बाल श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा पहुँचाता है। यह समाज में गरीबी, आवास और भोजन की कमी, गरीब लोगों के लिए सुविधाओं की कमी, शिक्षा की कमी, अमीर और गरीब के बीच में बड़ा अन्तर, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विकास आदि के कारण गहराई तक पहुँची हुई है।

भारत की राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार, बाल श्रमिकों की संख्या (4-15 आयु वर्ग) 1998 में, लगभग 12.6 मिलियन थी, 2009-10 के बीच में यह लगभग 4.98 मिलियन थी और 2011 में यह 4.35 मिलियन थी। इन आंकड़ों से यह ज्ञात होता है कि बाल श्रमिकों की संख्या में प्रति वर्ष कमी हुई है, जबकि सवाल यह उठता है कि इतने आधुनिक युग में रहने के बाद भी हम इसे पूरी तरह से खत्म करने योग्य क्यों नहीं है। मेरे विचार से इसके पीछे सबसे बड़ा कारण, आज भी लोगों की मानसिक अवधारणा में उस स्थिति तक परिवर्तन नहीं हुआ है जहाँ तक कि होना चाहिये था। समाज में आज भी गरीबों पर अमीरों की तानाशाही है। अमीरों और गरीबों के बीच में बहुत अधिक अन्तर है, पूरी तरह से विकसित लोग समाज में समानता को स्वीकार करने की क्षमता नहीं रखते हैं।

भारतीय कानून ने लगभग 64 उद्योगों को खतरनाक उद्योगों की श्रेणी में रखा है जिनमें बच्चों को काम पर नियुक्त करना अपराध माना जायेगा। 2001 में, लगभग 1,20,000 को देश में खतरनाक उद्योगों में काम करते हुए पाया गया था। भारत के संविधान ने खतरनाक उद्योगों में बच्चों का कार्य करना निषेध कर दिया है हालांकि सामान्य उद्योगों में नहीं जिसके कारण यह समस्या आज भी खत्म नहीं हो पायी है। यूनीसेफ के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि पूरे विश्व में भारत में सबसे अधिक बाल श्रमिक है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, लगभग 60% बच्चे कृषि में कार्यरत हैं वहीं संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार 70% बच्चे बाल श्रमिक के रुप में कार्य कर रहे हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 के द्वारा जोखिम वाले उद्योगों में बाल श्रम निषेध है। भारतीय दंड संहिता में बच्चों के कार्य करने को रोकने के लिए बहुत से कानून (जैसे किशोर न्याय (देखभाल और सुरक्षा) बाल अधिनियम 2000, बाल श्रम (निषेध और उन्मूलन) अधिनियम 1986 आदि।) हैं।

राष्ट्र के उत्थान के लिए है, ये एक समाधान,
बाल श्रम के रोक कर, बनाये देश महान।।

धन्यवाद।

जय हिन्द।

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