डी – 990ए
पंजाबी बाग,
नई दिल्ली।
दिनांक – 8, 7, 2017
प्रिय बहन पूनम,
शुभाशीष।
आज ही माता जी का पत्र आया। जिससे ज्ञात हुआ कि तुम्हारे परीक्षा में बहुत कम अंक आए हैं। तुम्हारा ध्यान पढाई पर कम और टी.वी. पर अधिक लगा रहता है।
प्यारी बहन, टी. वी. देखना कोई बुरी आदत नहीं है। लेकिन टी. वी. उतना ही देखना हितकर है जिससे आँखे और दिमाग न थके। ज्ञानवर्धक और अच्छे सीरियल ही देखने चाहिए। पढाई करने वाले छात्रों के लिए एक घंटा ही टी. वी. देखना उचित है।
अधिक टी. वी. देखने के कारण तुम गृह कार्य पूरा नहीं कर पाती कक्षा में जाकर तुम्हें नींद आती है गणित के प्रश्न हल करने में तुम असमर्थ रहती हो पढाए गए विषय को घर आकर न पढना तुम्हारी आदत सी बन गई है। कक्षा परीक्षा में तुम फेल हो जाती हो, इस कारण तुम्हें अध्यापिका से डांट पडती है। अपने सहपाठियों के समक्ष तुम्हें लज्जित होना पड़ता है। अपने कम नम्बरों की सुचना तुम घर में देना अपना कर्त्तव्य नहीं समझती।
मन कि टी. वी. सस्ता और मनोरंजक साधन है। लेकिन अति हर चीज की बुरी होती है। इसलिए तुम दृढ़ निश्चय कर अपनी इस अति को रोक कर अधिकाधिक समय पढाई में लगाओगी।
तुम्हारी बहन,
संगीता
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