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Unseen Passages

अपठित गद्यांश और पद्यांश Hindi Unseen Passages III

अपठित गद्यांश

अपठित का अर्थ होता है ‘जो पढ़ा नहीं गया हो’। यह किसी पाठ्यक्रम की पुस्तक में से नहीं लिया जाता है। यह कला, विज्ञान, राजनीति, साहित्य या अर्थशास्त्र, किसी भी विषय का हो सकता है। इनसे सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं। इससे छात्रों का मानसिक व्यायाम होता है और उनका सामान्य ज्ञान भी बढ़ता है। इससे छात्रों की व्यक्तिगत योग्यता व अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ती है।

विधि

अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों को हल करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

  1. दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
  2. गद्यांश पढ़ते समय मुख्य बातों को रेखांकित कर देना चाहिए।
  3. गद्यांश के प्रश्नों के उत्तर देते समय भाषा एकदम सरल होनी चाहिए।
  4. उत्तर सरल व संक्षिप्त व सहज होने चाहिए। अपनी भाषा में उत्तर देना चाहिए।
  5. प्रश्नों के उत्तर कम-से-कम शब्दों में देने चाहिए, साथ हीं गद्यांश में से हीं उत्तर छाँटने चाहिए।
  6. उत्तर में जितना पूछा जाए केवल उतना हीं लिखना चाहिए, उससे ज़्यादा या कम तथा अनावश्यक नहीं होना चाहिए। अर्थात, उत्तर प्रसंग के अनुसार होना चाहिए।
  7. यदि गद्यांश का शीर्षक पूछा जाए तो शीर्षक गद्यांश के शुरु या अंत में छिपा रहता है।
  8. मूलभाव के आधार पर शीर्षक लिखना चाहिए।

अपठित पद्यांश

अपठित पद्यांश का अर्थ है ‘वह कविता का अंश या कविता जो पहले पढ़ी न गई हो’। अपठित पद्यांश में किसी कविता का एक अंश दिया जाता है तथा उस पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। यह कविता किसी (अर्थात उसी कक्षा के) पाठ्यक्रम की पुस्तक में से नहीं दी जाती है। इसे पढ़कर इससे सम्बन्धित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इससे छात्रों की कविता पढ़ने और समझने की क्षमता का विकास होता है।

विधि

इनको हल करते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना अनिवार्य है।

  1. कविता को दो-तीन बार पढ़ना चाहिए, जिससे उसका भाव और अर्थ अच्छी तरह समझ में आ जाए।
  2. कविता को समझकर उत्तर देने चाहिए।
  3. प्रश्नों के उत्तर कविता की लाइनों में नहीं देने चाहिए, बल्कि अपने शब्दों में गद्य में देने चाहिए।
  4. उत्तर सरल, स्पष्ट और कम शब्दों का प्रयोग करके भावों के साथ व्यक्त करना चाहिए।

अपठित गद्यांश और पद्यांश Hindi Unseen Passages III [01]

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

बैसाखी उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन को रबी की फसल तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है इसलिए इसे कृषि पर्व भी कहा जाता है। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। इस दिन खालसा पंथ की स्थापना की खुशी में पंच प्यारों को याद करते हुए जुलूस निकाले जाते हैं।

आइए, बैसाखी से जुड़ीं एक कविता का आनंद लें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:

धरती के आँचल में सजी
सँवरी हैं स्वर्ण रश्मियाँ,

खेतों में आज बिखरा है सोना
जिसे देख कर महका

कृषक मन का कोना-कोना।
किया धरती का सोलह-सिंगार

चमचमाते नयन बार-बार,
धानी चुनर में मोती सजे हैं

ढोल, ताशे और बाजे बजे हैं
दिल की वीणा के झंकृत हैं तार

झूमें-गाएँ सबके मन बार-बार।
हुए आँखों में सब सपने साकार

फिर से जागी हैं उम्मीदें हजार।

  1. खेतों में क्या बिखरा हुआ है?
  2. किसान के नयन क्यों चमचमाते हैं?
  3. सबके मन क्यों झूम और गा रहे हैं?
  4. इस बार बेमौसम की बरसात ने फसलों का बहुत नुकसान किया है, आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या हम इसके लिए कुछ कर सकते हैं?

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