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स्वावलम्बन की प्रेरणा के लिए मित्र को पत्र

पी – 29 ए
राजा गार्डन,
नई दिल्ली।
दिनांकः 19. 7. 2017

प्रिय सखी रेखा,
सप्रेम नमस्ते।

तुम्हारा पत्र पढकर ज्ञात हुआ कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारी पढाई का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। इसलिए तुम्हारी पढाई भविष्य में छुट सकती है। मुझे लगता है कि यह समस्या गंभीर नहीं है। यह ऐसा सुअवसर है जब तुम्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। वैसे भी तुम्हें एक न एक दिन तो अपने पैरों पर खरे होना ही है।

स्वावलम्बी मनुष्य किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता, उसमें आत्मविश्वास भरा होता है। आत्मविश्वासी व्यक्ति शीघ्र सफलता प्राप्त करता है। समाज और परिवार दोनों ही उसे आदर की दृष्टि से देखते हैं। चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक रहती है। इसके विपरीत पराश्रित व्यक्ति कमजोर और असहाय होता है। लोग उसका आदर नहीं करते।बार-बार हाथ फैलाने से उसका आत्मविश्वास क्षीण हो जाता है। घर में कोई उसे महत्त्व नहीं देता। बिना सहायता के कोई भी कार्य वह पूरा नहीं कर पाता। तुम ट्यूशन करके भी अपनी पढाई का खर्च निकल सकती हो। जो अपनी सहायता स्वयं करता है ईश्वर भी उसकी सहायता करता है। इस आपत्ति में तुम घबराना नहीं, अपने आत्मविश्वास को मजबूत बनाए रखना। यही आत्मविश्वास तुम्हें सफलता की सीढ़ि पर चढ़ता चला जाएगा और एक दिन तुम लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सफल हो जाओगी।

शेष कुशल। घर में सबको यथायोग्य नमस्कार।

तुम्हारी सखी,
बिना

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