IIM उदयपुर ने शुरू किया फ्लेक्सिबल BBA प्रोग्राम

IIM उदयपुर ने शुरू किया फ्लेक्सिबल BBA प्रोग्राम

अब चाहे किसी भी ईयर में कोर्स छोड़ें छात्र, हाथ में पढ़ाई का होगा प्रमाण: IIM उदयपुर ने शुरू किया फ्लेक्सिबल BBA प्रोग्राम, जानें क्या मिलेगी सुविधा

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट उदयपुर (IIM Udaipur) ने एक नए अंडरग्रेजुएट मैनेजमेंट प्रोग्राम की घोषणा की है। यह एक लचीला एकेडमिक स्ट्रक्चर है, जिससे स्टूडेंट्स को इस आधार पर अलग-अलग डिग्री मिल सकती हैं कि वे कितने समय तक कोर्स करते हैं। इंस्टीट्यूट के नए बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) प्रोग्राम के लिए एप्लीकेशन 4 मार्च 2026 से शुरू होंगे।

IIM उदयपुर ने शुरू किया फ्लेक्सिबल BBA प्रोग्राम

पारंपरिक अंडरग्रेजुएट कोर्स में स्टूडेंट्स को तीन या चार साल का तय वक्त पर ग्रेजुएशन पूरा करना होता है, यह प्रोग्राम कई एग्जिट पॉइंट के साथ डिज़ाइन किया गया है यानी जो स्टूडेंट्स पहले साल के बाद छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सर्टिफिकेट मिलेगा। जो दो साल पूरे करेंगे उन्हें डिप्लोमा मिलेगा। जो तीन साल पूरे करेंगे उन्हें डिग्री मिलेगी, जबकि जो स्टूडेंट्स पूरे चार साल का कोर्स पूरा करेंगे, उन्हें ऑनर्स डिग्री मिलेगी।

यह मॉडल स्टूडेंट्स को प्रोग्राम में के दौरान अपनी पढ़ाई रोकने या छोड़ने की सुविधा देता है। इस दौरान पुराना बिताया गया समय भी जोड़ा जाएगा।

इंस्टीट्यूट का कहना है कि यह प्रोग्राम एक डिजिटल-फर्स्ट ऑफरिंग के तौर पर बनाया गया है, जिसका मकसद उन स्टूडेंट्स से आगे मैनेजमेंट एजुकेशन तक पहुँच बढ़ाना है जो फुल-टाइम रेजिडेंशियल कैंपस में शिफ्ट हो सकते हैं। टीचिंग में रिकॉर्डेड लेक्चर, लाइव इंटरैक्टिव ट्यूटोरियल, फैकल्टी मास्टरक्लास और ऑनलाइन होने वाले डिस्कशन-बेस्ड सेशन शामिल होंगे। साथ ही क्रेडिबिलिटी और एकेडमिक स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए एग्जाम सुपरवाइज्ड सेंटर्स में होंगे।

इस प्रोग्राम की एक और खास बात इसका बाइलिंगुअल लर्निंग फ्रेमवर्क है। कोर्स डिज़ाइन लर्नर्स को हिंदी-फ्रेंडली लर्निंग सपोर्ट के साथ अपनी पढ़ाई शुरू करने की सुविधा देता है। स्ट्रक्चर में इंग्लिश भी शामिल हैं, ताकि जो स्टूडेंट्स दोनों भाषाओं को जानते हैं, वे हिस्सा ले सकें। इस अप्रोच का मकसद छोटे शहरों और नॉन-इंग्लिश-मीडियम स्कूलिंग बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स के लिए मैनेजमेंट एजुकेशन को और आसान बनाना है, साथ ही पेशेवर अंदाज भी बनाए रखना है।

कोर्स का मॉड्यूलर स्ट्रक्चर ऐसे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए फायदेमंद हैं, जो अक्सर हायर एजुकेशन को पैसे की तंगी, परिवार की जिम्मेदारियों या नौकरी के साथ बैलेंस करते हैं। यह प्रोग्राम बिना किसी फॉर्मल योग्यता के स्टूडेंट्स के पढ़ाई छोड़ने के रिस्क को कम करने की कोशिश करता है।

इंस्टीट्यूट ने यह भी बताया है कि प्रोग्राम में अलग-अलग आर्थिक बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप सपोर्ट और आर्थिक मदद का भी विकल्प मौजूद है।

जानकारों का कहना है कि ऐसे लचीले और डिजिटली डिलीवर किए जाने वाले प्रोग्राम्स की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है, क्योंकि भारत एकेडमिक सख्ती बनाए रखते हुए हायर एजुकेशन तक पहुँच बढ़ाना चाहता है। अगर यह मॉडल पढ़ाई को लेकर गंभीर विद्यार्थियों को आकर्षित करने में कामयाब होता है, तो यह भविष्य में दूसरे इंस्टीट्यूशन्स को भी इसी तरह के विकल्प के साथ सामने आने का मौका मिलेगा।

इसलिए इस प्रोग्राम का लॉन्च होना, सिर्फ एक और कोर्स का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह भी एक टेस्ट है कि क्या बड़े इंस्टीट्यूशन से मिलने वाली लचीलापन, टेक्नोलॉजी वाली अंडरग्रेजुएट एजुकेशन, पारंपरिक रूप से उनसे जुड़ी विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए आगे बढ़ सकती है।

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