Tuesday , May 30 2017
Home / Essays / Essays in Hindi / सुभाषचन्द्र बोस पर निबंध
सुभाषचन्द्र बोस Essay on Netaji Subhas Chandra Bose

सुभाषचन्द्र बोस पर निबंध

देश को स्वतंत्र कराने मे जिन महान नेताओं ने वशेष योगदान दिया, उनमें सुभाषचन्द्र बोस का नाम चिर स्मरणीय है। सुभाषचन्द्र बोस के इस नारे से उत्त्साहित होकर, “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा” हजारों देशवासी स्वत्रन्त्रता संघर्ष में कूद पड़े थे। वे कहा करते थे, “मैं रहूं न रहूं आजाद रहे हिन्दुस्तान मेरा” और सचमुच हिन्दुस्तान तो आजाद हो गया पर वे आज तक नहीं आए।

सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ। इनके पिता जानकीदास बोस अपने समय के प्रसिद्ध वकील थे। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा कटक में ही हुई। सन् 1913 में इन्होंने मैट्रिक पास की। इनके पशचात उच्च शिक्षा के लिए ये कलकत्ता चले गए। वहाँ इन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया और प्रथम श्रेणी में बी० ए० की परीक्षा पास की। इसके पश्च्चात वे इंग्लैण्ड चले गए और आई. सी. एस. की परीक्षा पास की। परीक्षा पास करते ही उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई परन्तु देश की परतन्त्रता और भूखे -नंगे भारत ने इन्हें सरकारी सेवा से विमुख कर दिया। बंगाल के प्रसिद्ध देशभक्त नेता बाबू चितरंजन दास के नेतृत्व में ये स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पड़े। यह प्रारम्भ से ही गरम दल के नेता थे। विद्यार्थी काल में ही उन्होंने एक बार भारतीयों का अपमान करने के कारण अपने एक प्रोफेसर के मुँह पर तमाचा मार दिया था। गरम दल के नेता होते हुए भी वे गांधी जी का बड़ा सम्मान करते थे। उन्होंने गाँधी जी के साथ 1921 में ‘असहयोग आंदोलन’ और 1929 में ‘नमक आंदोलन ‘ में भाग लिया। जब चितरंजन दास गुप्त कलकत्ता कापोर्रेशन के मेयर बने तो उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस को कापोर्रेशन का उच्च अधिकारी बना दिया। अंग्रेज सरकार ने एक अंग्रेज की हत्या के झूठे आरोप में इन्हें मांडले जेल में डाल दिया। ये 1929 और 1937 में कलकत्ता कॉंग्रेस कापोर्रेशन के मेयर बने और 1938-1939 में कॉंग्रेस के सभापति बने।

नेताजी ने कॉंग्रेस की नीतियों से मतभेद के कारण त्याग पत्र दे दिया और ‘फारवर्ड ब्लाक’ नामक राजनैतिक दल का गठन किया। इस दल का उद्देश्य पूर्ण स्वराज्य और हिन्दू-मुस्लिम एकता था। इनकी गतिविधियों से सरकार बौखला उठी और इन्हें जेल में डाल दिया। सन् 1940 में अस्वस्थ होने के कारण इन्हें जेल से रिहा कर दिया गया, पर घर पर नजरबन्द कर दिया गया। 1941 में वे अंग्रेज सिपाहियों को चकमा देकर भाग जाने में सफल हो गए। ये सबसे पहले अफगानिस्तान पहुँचे और फिर जर्मनी गए। वहां हिटलर ने इनका स्वागत किया। जर्मन रेडियो ने सुभाशचन्द्र बोस ने स्वाधीनता का संदेश दिया। 1942 में ये जापान चले गए और वहाँ आजाद हिन्द फौज बनाई। ये देश को आजाद कराने के लिए बर्मा पहुँचे। इम्फाल में अंग्रेजी सेनाओं से लोहा लिया। इनके सैनिकों में देशभक्ति की भावना कूट -कूटकर भरी हुई थी और ये बराबर संघर्ष करते रहे। 1945 में जापान द्वारा हथियार डालने पर आजाद हिन्द फौज के सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया। 23 अगस्त 1945 को जापान के टोकियों रेडियो द्वारा विमान दुर्घटना में सुभाषचंद्र बोसे की मृत्यु का मामला रहस्यपूर्ण बना हुआ है।

सुभाषचन्द्र बोस का नाम स्वतन्त्रता सेनानियों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा। उनके द्वारा दिया गया, ‘जय हिन्द‘ का नारा आज हमारा राष्ट्रीय नारा है। जो 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से पूरे देश में गूंजता है। ध्वजारोहण कार्यक्रम का समापन ‘जयहिन्द’ के उद्घोष से होता है।

Check Also

Hindi Essay on Red Fort लाल किला पर निबंध

Red Fort लाल किले पर निबंध

मुगल सम्राटों ने भारतवर्ष पर लगभग चार सौ वर्ष तक एक छत्र राज्य किया। सम्राट …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *