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Cricket

मेरा प्रिया खेल: क्रिकेट पर हिंदी निबंध विद्यार्थियों के लिए

वैसे तो अनेक ऐसे खेल हैं जो विश्व के किसी न किसी कोने में खेले जाते रहते हैं और जो खेलनेवालों को स्वस्थ भी रखते हैं, उनका मनोरंजन भी करते हैं और दर्शकों को भी आकृष्ट करते हैं। परन्तु जिन खेलों को देखने के लिए खेल के मैदान में भीड़ उमड़ती है, जिन खेलों के पीछे लोग दीवाने रहते हैं, काम-काज छोड़कर, खाना-पीना भूलकर या तो खेल के मैदान में पहुंच कर खेल का आनन्द उठाते हैं या घर बैठे-बैठे कानों पर ट्रांजिस्टर लगाये आंखों देखा हाल सुनते हैं या दूरदर्शन के सामने घर बैठे प्रतियोगी टीमों का जादुई करिश्मा देखते हैं और जिन्हें देखने के लिए टी.वी. सैट के सामने भीड़ इकठ्ठी हो जाती है वे हैं – हॉकी, फुटबाल तथा क्रिकेट। जब से एक दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता आरंभ हुई है तब से तो इसका रोमांच इतना बढ़ गया है कि फुटबाल और हॉकी की लोकप्रियता काफी पिछड़ गयी है और क्रिकेट के एक दिवसीय मैच को देखने के लिए किशोर, युवक और प्रौढ़ ही नहीं वृद्ध लोग भी लालायित रहते हैं। यह खेल विश्व-भर में इतना लोकप्रिय है कि वर्ष-भर किसी न किसी देश में कोई न कोई प्रतियोगिता होती रहती है । विश्व कप की प्रतियोगिता चार वर्ष बाद होती है। इसमें अनेक देशों की टीमें भाग लेती हैं, लीग मैच होने के बाद विजय के अंकों के आधार पर पहले चार टीमें सेमी फाइनल मैच खेलती हैं और फिर अंत में दो टीमें फाइनल के लिए भिड़ती हैं। इनमें जितनेवाली टीम को चल वैजयन्ती तथा भारी रकम मिलती है, उपविजेता टीम को भी पुरस्कृत किया जाता है। इस खेल का विशेष आकर्षण यह है कि प्रत्येक मैच के बाद ‘मैन ऑफ दि मैच’ अर्थात् मैच का सर्वश्रेष्ट खिलाड़ी घोषित किया जाता है। अब यह खेल पुरुषों तक सीमित नहीं है – महिलाएं भी खेलती हैं और पुरुषों की तरह महिला-टीमों के बीच भी मैच होते रहते है, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाता है। यह खेल भारत में तो इतना लोकप्रिय हो गया है कि महानगरों में ही नहीं नगरों, कस्बों यहाँ तक कि गाँवों तक में लड़के इस खेल को चाव से खेलते हैं। बिना साजो-सामान के सड़कों, पार्कों, गली-कूचों तक में इस खेल को खेलनेवाले बड़े मनोयोग से खेलते हुए देखे जा सकते हैं।

बाकायदा क्रिकेट खेलने के लिए एक खुला लम्बा-चौड़ा मैदान चाहिए जैसे दिल्ली में अम्बेडकर स्टेडियम, मुंबई में वानखेड़े मैदान। मैदान के बीच में लगभग बाईस मीटर का पिच बनाया जाता है। पिच के दोनों छोरों पर तीन-तीन इंच की दूरी पर तीन लकड़ी के बने विकिट सीधे-समप्रमाण पर गाढ़े जाते हैं। पिच के दोनों छोरों पर एक एक खिलाड़ी खड़ा होता है और बैटिंग करता है अर्थात् दूसरे छोर से विरोधी टीम के गेंदबाज दारा तीव्र गति से फैंकी हुई बॉल का सामना करते हुए अपने बैट से उस पर इस तरह प्रहार करता है कि वह क्षेत्र-रक्षकों को छकाती हुई दूर निकल जाये। प्रत्येक टीम में ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी होते हैं, दो-एक एक्स्ट्रा रखे जाते हैं। उनका प्रयोग नियमित ग्यारह खिलाड़ियों में से किसी के चोट लग जाने पर किया जाता है। इन ग्यारह खिलाड़ियों में एक कप्तान, एक उपकप्तान, एक विकेट-रक्षक, चार-पांच गेंदबाज होते हैं। शेष बल्लेबाज होते हैं। टॉस जितने के बाद जिस टीम के दो खिलाड़ी मैदान में बल्लेबाजी करने के लिए आते हैं उसे बैटिंग टीम और जो टीम गेंदबाजी करती है उसे फील्डिंग टीम कहते हैं। फील्डिंग टीम के खिलाड़ियों में दोनों छोरों से गेंद फेंकनेवालों के अतिरिक्त एक विकेट कीपर होता है और शेष खिलाड़ी अपने कप्तान के आदेश पर क्षेत्र-रक्षण का कार्य करने के लिए मैदान में अपनी-अपनी जगह खड़े हो जाते हैं। प्रायः प्रत्येक मैच में दो निर्णायक होते हैं जो एम्पायर कहलाते हैं और निर्णय देते रहते हैं कि गेंदबाज या बल्लेबाज कोई अनियमितता तो नहीं कर रहे। खिलाड़ी के विकेट में गेंद लगने या उसके बल्ले से लगी गेंद के लपके जाने पर खिलाड़ी अपनी जगह छोड़ कर चला जाता है और उसका स्थान दूसरा खिलाड़ी लेता है। अपनी-अपनी पारी में दोनों टीमें अधिकाधिक रन बनाने का प्रयास करती हैं। दो विकटों के बीच दोनों खिलाड़ियों के दौड़ने को रन कहा जाता है। यदि किसी खिलाड़ी के दूसरे छोर पर पहुंचने से पूर्व ही क्षेत्ररक्षक उस छोर के विकट को गेंद से गिरा देता है तो वह दौड़नेवाला खिलाड़ी आउट हो जाता है। अब विवादास्पद मुद्दों का निर्णय करने के लिए तीसरा एम्पायर या रेफ्री रखने की भी प्रथा चल पड़ी है जो दूरदर्शन की स्क्रीन पर रिप्ले को देखकर अपना निर्णय देता है। जो टीम अधिक रन बनती है उसे विजयी टीम घोषित किया जाता है।

दर्शकों के लिए मैदान या स्टेडियम में मैदान के दो-तीन ओर सीढ़ीनुमा सीटें होती हैं। एक ओर पटावदार भवन या शामियाना होता है जिसे पैविलियन कहते हैं। इस पैविलियन में दोनों टीमों के खिलाड़ी, प्रबन्धक तथा विशिष्ट अतिथि बैठते हैं। एक दिवसीय मैच रात-दिन का भी होता है। अर्थात् दिन के बाहर-एक बजे से रात को मैच समाप्त होने तक खेला जाता है। संध्या होते ही मैदान में बिजली की इतनी तीव्र रोशनी होने लगती है कि वे दिन के प्रकाश में खेल रहे हों। एक दिवसीय मैच में प्रत्येक टीम को पचास-पचास ओवर खेलने को मिलते हैं। जब गेंदबाज अपने छोर से दूसरे छोर पर विकेट पास खड़े बल्लेबाज को आउट करने के लिए छः बार गेंद फेंक लेता है तो उसे ओवर कहा जाता है। यह खेल बड़ा रोमांचक है और मेरा सर्वप्रिय खेल है।

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