Saturday , August 19 2017
Home / Essays / Essays in Hindi / विज्ञापन युग पर निबंध Hindi Essay on Advertising Era
विज्ञापन युग पर निबंध Hindi Essay on Advertising Era

विज्ञापन युग पर निबंध Hindi Essay on Advertising Era

आज का युग विज्ञापन का युग है। जब से उपभोक्ता संस्कृति का प्रचार और प्रसार हुआ है तब से विज्ञापनों की भरमार सी आ गई है। आज प्रतियोगिता का समय है। बाजार में अत्याधिक संकुचन है। इसलिए प्रत्येक उत्पादक कम से कम दाम लगाकर अधिक से अधिक लाभ अर्जित करना चाहता है। अपनी वस्तु की बिक्री के बढ़ाने और अधिक लाभ कमाने के लिए व्यापारी विज्ञापनों का सहारा लेते हैं।

विज्ञापन समाचार-पत्रों के द्वारा, पत्रिकाओं के माध्यम से, रेडियों और दूरदर्शन के माध्यम से, हैंड बिल छपवाकर दीवारों पर अवाकर और उद्‌घोषक के द्वारा घोषणा कराकर दिए जाते हैं। कई बार एक कम्पनी अपने प्रचार के लिए कई-कई माध्यमों का सहारा लेती है।कवि सम्मेलनों, दोवाली मेलों और अन्य कई प्रकार के कार्यक्रमों के विज्ञापन भी देखे जा सकत हैं। विज्ञापनों की भाषा बड़ी आकर्षक और लच्छेदार होती है। वस्त्र आदि का विज्ञापन करते समय नाना प्रकार की सुंदरियों को उपयोग में लाया जाता है। परिधान व्यवसाय में तो विज्ञापन सुंदरियों के सहारे ही आगे बढ़ते हैं। विज्ञापन दाता विश्व सुंदरियों, अभिनेत्रियों, अभिनेताओं और खिलाड़ियों का उपयोग करते हैं। वे उन्हें इसके लिए अच्छी खासी राशि देते हैं।

कभी-कभी विज्ञापन दाता व्यक्तियों की धार्मिक भावनाओं का भी पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं। दशहरे और दीपावली के अवसर पर मिठाई बनाने वाले अपनी ख्याति का पूरा-पूरा लाभ उठाते हैं। विज्ञापन की बदौलत ही चालीस रुपये किलों की मिठाई अस्सी और सौ रुपये किलो बिकती है। कई बार हम विज्ञापनों की चकाचौंध में इतने खो जाते हैं कि सही निर्णय नहीं ले पाते।विलासिता की वस्तुओं के विज्ञापन देकर उत्पादक लागत मूल्य से बीसों गुणा लाभ कमाते हैं। विशेषकर महिलाओं के उपयोग में आने वाली वस्तुओं की खूब कीमत वसूल की जाती है। दवाओं के विज्ञापन के चक्कर में पड़ कई बार हम अपना स्वास्थ्य खराब कर बैठते हैं।

चुनाव के दिनों में राजनैतिक पार्टियों के विज्ञापन और पोस्टर देखने योग्य होते हैं। हर पार्टी लम्बे चौड़े वादे करते हुए इश्तहार निकालती हैं। नेताओं की तस्वीरें छापी जाती हैं। लाउडस्पीकरों से धुआंधार प्रचार किया जाता है और कई बार तो विज्ञापनों की बदौलत एक साधारण प्रत्याशी जीत जाता है और कहीं से कहीं पहुँच जाता है। कई बार विज्ञापन दूसरों की छवि को खराब करने का भी कारण बनते हैं और कई बार धार्मिक विद्वेष को भी भड़काते हैं।

आज विज्ञापनों में स्त्रियों का प्रयोग बहुत अधिक बढ़ गया है। अर्धनग्न अवस्थाओं के विज्ञापन दाता विज्ञापन करते हैं। सिनेमा के विज्ञापन तो कई बार सीमा ही पार कर जाते हैं। अंग्रेजी फिल्मों के विज्ञापन और अनेक पत्रिकाएं नग्नता का प्रसारण करने में सर्वाधिक आगे हैं। इस प्रकार के विज्ञापनों पर रोक लगाई जानी चाहिए। विज्ञापनों के पीछे हमारा दृष्टिकोण स्वस्थ और नैतिक होना चाहिए।

Check Also

पोंगल पर निबंध Hindi Essay on Pongal Festival

पोंगल पर निबंध Hindi Essay on Pongal Festival

जिस प्रकार ओणम् केरलवासियों का महत्त्वपूर्ण त्योहार है। उसी प्रकार पोंगल तमिलनाडु के लोगों का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *