Thursday , August 22 2019
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Essays in Hindi

भ्रष्टाचार के बढ़ते कदम – भ्रष्टाचार तेरे रूप अनेक पर निबंध

Corruption

भ्रष्टाचार का अर्थ है भ्रष्ट आचरण अर्थात् ऐसा आचार-व्यवहार, ऐसे कार्य जो नीति-विरुद्ध हों, जो दूसरों को कष्ट देते हों। दूसरों को पीड़ा पहुँचना सबसे बड़ा पाप है, तुलसीदास कह गये हैं, ‘पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।’ परन्तु आज कलियुग है, पाप-पुण्य के सम्बन्ध में सोचने और पाप-पुण्य की समीक्षा …

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भारत में राजभाषा समस्या पर विद्यार्थियों के लिए हिन्दी निबंध

Hindi Grammar

राजभाषा वह भाषा होती है जिसे प्रशासनिक कार्यों के लिए या कहें राजकार्य के लिए शासन तंत्र के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, कार्यालयों, न्यायालय या संसद आदि में प्रयुक्त किया जाता है। यह आवश्यक नहीं कि राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा एक ही हो। राष्ट्रभाषा तो राजभाषा हो सकती है, परंतु राजभाषा राष्ट्रभाषा …

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राष्ट्रभाषा हिन्दी: दशा और दिशा पर विद्यार्थियों के लिए हिन्दी निबंध

हिंदी

जिस प्रकार राष्ट्र ध्वज, राष्ट्र पक्षी, राष्ट्र पशु देश की एकता के प्रतिक होते हैं वैसे ही राष्ट्रभाषा भी। जो भाषा थोड़ी-बहुत सम्पूर्ण राष्ट्र में बोली और समझी जाती है वही राष्ट्रभाषा होती है। उसका प्रयोग राष्ट्र के सामान्य जन करते हैं, वह सारे देश की सम्पर्क भाषा होती है। …

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मेरा प्रिया खेल: क्रिकेट पर हिंदी निबंध विद्यार्थियों के लिए

Cricket

वैसे तो अनेक ऐसे खेल हैं जो विश्व के किसी न किसी कोने में खेले जाते रहते हैं और जो खेलनेवालों को स्वस्थ भी रखते हैं, उनका मनोरंजन भी करते हैं और दर्शकों को भी आकृष्ट करते हैं। परन्तु जिन खेलों को देखने के लिए खेल के मैदान में भीड़ …

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वैशाखी त्यौहार पर विद्यार्थियों के लिए हिंदी निबंध

वैशाखी त्यौहार पर विद्यार्थियों और बच्चों के लिए हिंदी निबंध

वैशाखी का पर्व सम्पूर्ण भारत में न मनाया जाकर केवल उत्तर भारत के पंजाब-हरियाणा प्रदेशों में मनाया जानेवाला त्यौहार है। इस त्यौहार का संबंध किसी धार्मिक या सांस्कृतिक परम्परा से नहीं है। यह शुद्ध रूप से रबी की फसल से सम्बन्ध रखने वाला मौसमी और फसली त्यौहार है। उत्तर भारत …

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युद्ध: अभिशाप या वरदान पर निबंध छात्रों के लिए

Kargil War

मनुष्य स्वभाव से स्वार्थी, महत्वाकांक्षी और अहंकारी होता है। वह स्वयं को, अपने विचारों और सिद्धान्तों को अन्यों की तुलना में श्रेष्ठ मानता है। ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्य, प्रतिस्पर्धा और दूसरों से स्वयं को अधिक शक्तिशाली दिखाने की प्रवृत्ति भी मनुष्य में होती है। ये सब आसुरी भाव हैं जिनका सम्बन्ध …

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नेताजी चुनाव से पूर्व और चुनाव के बाद: निबंध

Politician

नेताजी शब्द का प्रयोग स्वतंत्रता से पूर्व उस देशभक्त के लिए किया जाता था जो अपना स्वार्थ, अपनी सुख-सुविधा त्यागकर, अपने परिवार की चिन्ता न कर, अपने प्राणों की पपरवाह न कर देश को स्वतंत्र करने के लिए अपना सर्वस्व त्यागने के लिए तत्पर रहता था। वे चरित्रवान्, निष्ठावान्, देश …

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युद्ध और शान्ति पर निबंध विद्यार्थियों के लिए

Peace Sign

मनुष्य के बाह्य क्रिया-कलाप उसकी आन्तरिक भावनाओं के ही प्रतिरूप और परिणाम होते हैं। जब मनुष्य के हृदय में सतोगुण का उदय होता है, सद्विचार और पावन भावनाओं का संचार होता है तो वह सुकर्म करता है, ऐसे कार्य करता है जिनसे मानवजाति का भला हो, विश्व में शान्ति, सुख, …

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निःशस्त्रीकरण पर निबंध विद्यार्थियों के लिए

Say No To War

प्रथम महायुद्ध (1914-1918) में हुए नर-संहार, जन-धन की क्षति, विध्वंस और विनाश को देखकर सभी चिन्तित हो उठे और ऐसे प्रलयंकारी युद्ध की पुनरावृत्ति न हो इस उद्देश्य से लीग ऑफ नेशन्स की स्थापना की गयी। परंतु बीस-इक्कीस वर्ष बाद ही कुछ महत्वाकांक्षी, सैन्य शक्ति के मद में अंधे राष्ट्रों-विशेषतः …

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छत्रपति शिवाजी महाराज पर निबंध छात्रों के लिए

छत्रपति शिवाजी महाराज पर निबंध छात्रों के लिए

दृणनिश्चयी, महान देशभक्त, धर्मात्मा, राष्ट्र निर्माता तथा कुशल प्रशासक शिवाजी का व्यक्तित्व बहुमुखी था। माँ जीजाबाई के प्रति उनकी श्रद्धा ओर आज्ञाकारिता उन्हे एक आदर्श सुपुत्र सिद्ध करती है। शिवाजी का व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उनसे प्रभावित हो जाता था। साहस, शौर्य तथा तीव्र …

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